यमुनोत्री मंदिर , उत्तराखंड

स्थल

  • यमुनोत्री मंदिर गढ़वाल हिमालय के पश्चिम में समुद्र ताल से 3235 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है |
  • माना जाता है की जो व्यक्ति चार धाम यात्रा कर लेता है , उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है |
  • इन्ही चार धामों में से एक धाम है यमुनोत्री मंदिर भी है |
  • यमुनोत्री मंदिर के कपाट हर साल अक्षय तृतीया के दिन खुलते हैं और दिवाली के दुसरे दिन बंद कर दिए जाते हैं |

पौराणिक कथा

  • आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं , जिसे हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण माना गया है , इस मंदिर को माता यमुनोत्री के मंदिर से जाना जाता है |
  • शास्त्रों के अनुसार माता यमुना सूर्य देव की पुत्री है और धर्म राज यमराज की छोटी बहन |
  • इस मंदिर में मृत्यु के देवता यमराज अपनी छोटी बहन यमुना के साथ विराजमान हैं |

मंदिर निर्माण

  • यमुनोत्री मंदिर का निर्माण टिहरी गढ़वाल महाराजा प्रताप शाह ने कराया था |
  • परन्तु इस धाम का पुनः निर्माण जयपुर की महारानी गुलेरिआ ने १९वी सदी में करवाया था |
  • मंदिर के गर्भगृह में यमुना देवी की काले संगमरमर की प्रतिमा स्थापित है यमुनोत्री मंदिर का मुख्य आकर्षण देवी यमुना के लिए समर्पित मंदिर एक जानकी चट्ठी है |

पवित्र कुंड

  • यमुनोत्री मंदिर से ही यमुना नदी का जन्म हुआ है |
  • इसके समीप ही दो पवित्र कुंड हैं जिसे सूर्य कुंड और गौरी कुंड के नाम से जाना जाता है |
  • सूर्य कुंड के जल का तापमान उच्चतम होने के कारण प्रसिद्ध है |
  • यहाँ आने वाले भक्त कपडे की पोटली में चावल सूर्य कुंड के जल में पकाते हैं और प्रसाद के रूप ग्रहण करते हैं कहा जाता है कि सूर्य कुंड में स्नान करने के बाद यमुनोत्री आने वाले भक्तों की थकान पल भर में दूर हो जाती है |

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