मुरुदेश्वर मंदिर, कर्नाटक

स्थल

  • इस पौराणिक मंदिर का नाम है मुरुदेश्वर |
  • मुरुदेश्वर कर्णाटक राज्य में उत्तर कन्नड़ ज़िले के भटकल तहसील में स्थित एक क़स्बा है |
  • इस कस्बे का नाम भगवान शिव के नाम पर पड़ा |
  • यह स्थान अरब सागर के तट पर मंगलोर से १६५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |
  • मुरुदेश्वर मंदिर पश्चिम घाट की पहाड़ियों से घिरा हुआ है |

मंदिर निर्माण

  • भारत में ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं |
  • जिनका सम्बन्ध या तो किसी युग से है या फिर उनका इतिहास १००० साल पुराना है |
  • इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है |
  • मुरुदेश्वर मंदिर का नाम भगवान् शिव को समर्पित है |
  • मुरुदेश्वर, भगवान् शिव का ही एक नाम है, इस मंदिर की सबसे विशेष बात यह है की इसके परिसर में भगवान् शिव की एक विशाल मूर्ति है जिसे दुनिया की दूसरी सबसे विशाल और ऊँची शिव प्रतिमा माना जाता है |
  • भगवान् शिव की इस विशाल मूर्ति की ऊंचाई करीब १२३ फ़ीट है |
  • इसे बनाने में २ साल का समय लगा था और लगभग ५ करोड़ रूपए थी |
  • इस प्रसिद्ध मंदिर को देखने के लिए लोग विदेशो से आते हैं |
  • मुरुदेश्वर मंदिर में भगवान् शिव का आत्मलिंग भी स्थापित है |

पौराणिक कथा

  • पौराणिक कथा के अनुसार, रावण जब अमरता का वरदान पाने के लिए भगवान् शिव की तपस्या कर रहे थे तब भगवान् शिव ने प्रसन्न होकर रावण को शिवलिंग दिया और कहा की अगर अमर होना चाहते हो तो इसे लंका लेजाकर स्थापित करना और इसे जहाँ रखोगे यह वहीँ स्थापित हो जाएगा |
  • लंका की ओर जाते हुए रास्ते में शिवलिंग को धरती पर रख दिया और वह वहीँ स्थापित हो गया |
  • रावण को क्रोध आगया और उसने शिवलिंग को नष्ट करने का प्रयास किया |
  • जिस वस्त्र से शिवलिंग ढका हुआ था, वह म्रिदेश्वर के कंदुका पर्वत पर जा गिरा |
  • म्रिदेश्वर को ही अब मुरुदेश्वर के नाम से जाना जाता है |

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