कोणार्क सूर्य मंदिर, उड़ीसा

स्थल

  • भारत के उड़ीसा राज्य में कोणार्क सूर्य मंदिर स्थित है |
  • यह मंदिर जगन्नाथ पूरी से ३५ किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित है |
  • सूर्य मंदिर को १९४९ में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल की मान्यता दी थी |
  • इस मंदिर की भव्यता के कारण ये देश के सबसे बड़े मंदिरों में गिना जाता है |

मंदिर निर्माण

  • इस मंदिर की रचना इस प्रकार से की गयी है जैसे एक रथ में बहुत बड़े पहिये लगाए गए हो और उस रथ को ७ ताकतवर घोड़े खींच रहे हो और उस रथ पर सूर्य देव को विराजमान दिखाया गया है |
  • ७ घोड़े ७ दिन के प्रतीक है, और १२ जोड़ी पहिये २४ घंटो के प्रतीक है |
  • यह मंदिर सूर्य देवता के रथ के आकार का ही बनाया गया है, और इस मंदिर में कोई भी मूर्ति नहीं है |
  • यह मंदिर समय की गति को दर्शाता है |

पौराणिक कथा

  • वहां के स्थानीय लोग इस मंदिर को बिरचि नारायण कहते थे |
  • पुराणों के अनुसार, श्री कृष्णा के पुत्र साम्ब श्राप से कोढ़ रोगी बन गए थे |
  • साम्ब ने कोणार्क के मित्रवन में चंद्रभागा नदी के सागर संगम पर १२ वर्षों तक कठोर तपस्या की |
  • उन्होंने सूर्य देवता को प्रसन्न किया |
  • सूर्य देवता ने तपस्या से प्रसन्न होकर साम्ब के रोग का निवारण किया |
  • साम्ब ने सूर्य भगवान् का एक मंदिर बनवाया |
  • अपने रोगों से मुक्ति पाने के बाद वह चंद्रभागा नदी में स्नान करने गए, वहां उन्हें सूर्य देव की मूर्ति मिली |
  • इस मूर्ति को सूर्य देव के शरीर के ही भाग से बनाया गया |
  • साम्ब ने इस मूर्ति को अपने बनवाये मित्रवन में स्थापित किया |

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